सरकारी परीक्षा की तैयारी में खुद पर भरोसा क्यों डगमगाने लगता है
कभी‑कभी ऐसा लगता है कि पढ़ाई तो चल रही है, किताबें खुल रही हैं, नोट्स भी बन रहे हैं, फिर...
कभी‑कभी ऐसा लगता है कि पढ़ाई तो चल रही है, किताबें खुल रही हैं, नोट्स भी बन रहे हैं, फिर...
कभी‑कभी समझ ही नहीं आता कि वही किताब, वही कुर्सी, वही कमरा… फिर भी पढ़ाई हर महीने पहले से भारी...
कभी‑कभी बात यहीं से शुरू होती है कि फार्म भरने की आख़िरी तारीख निकल जाती है, और आदमी जानबूझकर भरता...
सरकारी परीक्षा की तैयारी में समय के साथ मन और जीवन क्यों भारी हो जाते हैं यह बात अक्सर किसी...
कभी-कभी ऐसा लगता है कि तैयारी करते-करते मन खुद से ही थक गया है। बिना बोले। बिना शोर के। सुबह...